कैलाश माली बघेरा। चैत्र कृष्ण दशमी के अवसर पर गांव बघेरा में सुहागिन महिलाओं ने दशा माता का व्रत रखकर पीपल के वृक्ष की पूजा-अर्चना की। यह व्रत परिवार की सुख-समृद्धि और शांति की कामना के लिए किया जाता है।महिलाएं पारंपरिक वेशभूषा में सज-धज कर पीपल के पेड़ के नीचे एकत्रित हुईं और विधि-विधान से पूजा की। इस दौरान महिलाओं ने सूत के 10 तारों वाला डोरा धारण किया, जिसे दशा माता का प्रतीक माना जाता है। पूजा के बाद महिलाओं ने दशा माता की कथा भी सुनी मान्यता है कि इस व्रत को करने से घर की दशा सुधरती है और परिवार में सुख-समृद्धि का आगमन होता है। साथ ही यह व्रत ग्रहों के प्रतिकूल प्रभाव को दूर करने तथा गृहस्थ जीवन में सुख-शांति बनाए रखने के लिए भी महत्वपूर्ण माना जाता है।दशा माता व्रत से जुड़ी प्रचलित कथा के अनुसार राजा नल और रानी दमयंती ने भी चैत्र मास में यह व्रत कर दशा माता को प्रसन्न किया था, जिसके बाद उन्हें अपना खोया हुआ राज्य और सम्मान पुनः प्राप्त हुआ।
बघेरा में महिलाओं ने किया दशा माता व्रत, पीपल वृक्ष की पूजा
न्यू राजस्थान धरा न्यूज
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