पाली/इंद्रा नगर में नए साल की पहली सुबह जब सूरज की सुनहरी किरणें मठ तालाब सरोवर के शांत जल पर चमकने लगीं, तभी वहां का वातावरण आध्यात्मिकता, करुणा और सेवा से सराबोर हो उठा। इंद्रानगर मठ तालाब के तट पर धर्मप्रेमियों, ग्रामीणों और जीव-जंतुओं से प्रेम करने वाले लोगों ने वर्ष के पहले दिन एक अद्भुत और प्रेरणादायक दृश्य प्रस्तुत किया। सुबह होते ही पाली ब्लॉक सहित आसपास के गांवों से लोग मछलियों को भोजन कराने पहुंचे। कोई आटे की गोलियां, कोई ब्रेड के पैकेट, तो कोई मुरमुरे और रोटियां लेकर आया। सूर्योदय से पहले ही तालाब के किनारे मानवता और जीवदया का पवित्र संगम देखने को मिला। यह दृश्य मानो संदेश दे रहा था कि जीव सेवा ही शिव सेवा है, और करुणा ही मानव जीवन का सबसे बड़ा धर्म।" इस अवसर पर सोनी परिवार, ओमप्रकाश मेहता, जय सोनी, नितेश सोनी, सहित प्रतिदिन सुप्रभात वेला में भोजन कराने वाले राजेंद्र ओड ठेकेदार भी उपस्थित रहे। उनके साथ कई धर्मप्रेमी और जीव-जंतु हितैषी जनों ने मछलियों को दाना डालकर नए वर्ष की शुरुआत सेवा के साथ की। सबसे सुंदर और प्रेरणादायक दृश्य तब देखने को मिला जब नन्ही-नन्ही बालिकाएँ पिंकी और गुंजन भी हाथों में दाना लेकर मछलियों को भोजन कराने पहुंची। मासूम हृदयों में भी सेवा, करुणा और धर्म का अंकुरण होते देख उपस्थित जन भावविह्वल हो उठे। ऐसा प्रतीत हुआ मानो आने वाली पीढ़ी को स्वयं प्रकृति धर्म और दया का पाठ सिखा रही हो। मानव जीवन क्षणभंगुर है, अतः जब तक श्वास साथ दे, सेवा और उपकार का मार्ग न छोड़े। जीवों की सेवा ही मन की सेवा है, और यही जीवन का सबसे सच्चा उद्धार है
इंद्रानगर मठ तालाब की यह सुबह सिर्फ सूर्योदय नहीं, बल्कि मानवता के नए उजाले का आरंभ बनी। नए साल की पहली किरणों के साथ उठी यह सेवा भावना पूरे क्षेत्र में प्रेरणा का दीप जला गई।
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