सीसवाली 19 फ़रवरी.
कथा-प्रवचन करने वाले संत और साधुजन मनुष्य को आने वाले समय के लिए आगाह कर रहें हैं कि वक्ता के कहने से सुधर जाओ अन्यथा फिर वक़्त ही सुधार सकता है और वक्त ज़ब सुधारता है तो सातों जन्म याद आ जाते हैं
उक्त उदगार श्री गोविन्द गौशाला सीसवाली में चल रही श्रीमदभागवत कथा के पाँचवे दिन कथा प्रवक्ता पंडित रवि गौतम कंदाफल ने श्रद्धांलुओं के सामने कहे.
श्री मदभागवत कथा सप्ताह में गुरुवार के दिन कथा का शुभारम्भ आज के यजमान वरिष्ठ नागरिक चंद्रशेखर बोहरा, गिरिराज बागड़ी सोनवाँ, समीर नैनीवाल, मनोज हिन्दू शाहपुरा तथा अभिनव सतीश नैनीवाल ने सपत्निक श्री मदभागवत जी की पूजा अर्चना व आरती कर कथा का शुभारम्भ किया. कथा प्रवक्ता पंडित रवि गौतम कंदाफल ने पाँचवे दिन की कथा प्रारम्भ करते हुए कहा कि वक्ता और वक्त इन दो शब्दों का महत्व आपको संत-महंत व साधुजन कथा प्रवचनों के दौरान रोज़ कहते आ रहें हैं कि वक्ता के कहने से ही मनुष्य जीवन में चल रही विकृतियों और बुराइयों में सुधार कर लें अन्यथा ज़ब फिर वक्त आता है तो अपने हिसाब से ही सुधारता है , जिसमें राहभर्मित मनुष्य को अपने सातों जन्म याद आ जाते हैं. कथा प्रवक्ता ने कबीरदास जी के एक दोहे " मोहे सुन सुन आवे हाँसी-दही छोड़ पानी बिलोवत , व्यर्थ जन्म गंवासी " अधिकतर मनुष्य भगवान की भक्ति को भूलकर दुनियाँदारी के भयंकर जंजाल में उलझ गए हैं , जबकि भारतवर्ष की धरती पर तो पशु-पक्षी व जानवर भी निरंतर भगवान जी की भक्ति से तर गए हैं, रामायण जी के एक प्रसंग में जटायु का उदाहरण देते हुए कहा कि जटायु सतत भगवान भक्ति के चलते स्वयं भगवान के स्वरूप में ही बेकुंठ में गए. कथा प्रवक्ता द्वारा प्रवचनों में ठेठ हाड़ौती भाषा के उच्चारण से कथा-प्रवचन ग्रामीण जनों के सीधे दिल में उतर रहें हैं. अबोधपन में बच्चों को संस्कार नहीं मिलने के चलते समाज मे कई विसंगतियाँ व सामाजिक मूल्यों मे गिरावट आई हैं, जिसके कुपरिणाम हम नवयुवाओं में देख रहें हैं. कथा प्रवता ने उपस्थित श्रद्धांलुओं के दिल को छूते कहा कि "कथा-प्रवचनों " को भी डेकोरम इवेंट की लोगों ने बहुत महंगा और खर्चीला बना दिया है, भव्य पांडाल और दिखावे में कथा का स्वरूप गौण हो गया है, जबकि मेरा मानना है कि कथा-प्रवचन में सादगी और समर्पण का भाव मिल जाए तो यही कथाएं गाँव-गाँव और घर घर पहुंचेगी. जिस घर में यदि एक भी जन भगवान के भजन करने वाला हो जाता है , वो पूरी पीढ़ी को ही तार देता है , इसके लिए उन्होंने हिरनाकश्यप-भक्त प्रहलाद , रावण-विभीषण आदि का उदाहरण दिया. कथा के अंत में यजमानों द्वारा श्री मदभागवत और व्यास पीठ की आरती की गई.
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